अर्जुन मेहताVIEW PROFILE →
भारत में हर चौथा नया स्टार्टअप अब AI कंपनी: Tracxn रिपोर्ट में तेज़ी के साफ संकेत
RTP Global और Tracxn की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऑपरेटर के नेतृत्व वाले हर चार में से एक स्टार्टअप अब AI कंपनी है, और AI स्टार्टअप की फंडिंग 2023 से 2025 के बीच कई गुना बढ़ गई है।
भारत का स्टार्टअप परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। एक नई रिपोर्ट बताती है कि देश में शुरू हो रहे नए स्टार्टअप्स में AI की मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह साफ है कि तकनीक की अगली लहर पर देश के उद्यमियों का बहुत बड़ा दांव लगा हुआ है।
हर चौथा स्टार्टअप AI कंपनी
रिपोर्ट का सबसे उल्लेखनीय आंकड़ा यही है कि ऑपरेटर के नेतृत्व वाले हर चार में से एक स्टार्टअप अब एक AI कंपनी है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच स्थापित हुए 189 ऑपरेटर-फाउंडेड टेक स्टार्टअप्स में से 51 सीधे तौर पर AI क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां थीं, जो इस रुझान की गहराई और गंभीरता को दर्शाता है।
इन AI स्टार्टअप्स के भीतर भी काफी विविधता साफ दिखती है। इनमें से लगभग 30 कंपनियां वर्टिकल AI पर काम कर रही हैं, यानी किसी खास उद्योग या समस्या के लिए तैयार किए गए विशेष समाधान। शेष कंपनियां हॉरिजॉन्टल AI, डेवलपर टूल्स और एंटरप्राइज AI जैसे व्यापक क्षेत्रों में अपनी जगह बना रही हैं।
फंडिंग में जबरदस्त उछाल

निवेश के आंकड़े इस उत्साह की पूरी पुष्टि करते हैं। वर्ष 2023 से 2025 के बीच इन AI स्टार्टअप्स को कुल मिलाकर करीब 186 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल हुई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह राशि हर साल तेज़ी से बढ़ती चली गई, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के लगातार बढ़ते भरोसे को दिखाती है।
साल-दर-साल तुलना करें तो यह वृद्धि और भी स्पष्ट हो जाती है। जहां 2023 में AI स्टार्टअप्स को महज 11.1 मिलियन डॉलर मिले थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 131.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। महज दो साल की अवधि में इतनी बड़ी छलांग इस पूरे क्षेत्र की रफ्तार को बखूबी बयां करती है।
शुरुआती दौर में बड़ा निवेश
शुरुआती चरण, यानी सीड स्टेज की फंडिंग में भी यही तेज़ी साफ दिखती है। 2023 में सीड स्टेज पर सिर्फ 4.3 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ था, जो 2025 में बढ़कर 75.2 मिलियन डॉलर हो गया। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक अब बहुत शुरुआती दौर से ही AI कंपनियों पर दांव लगाने के लिए तैयार हैं।
औसत फंडिंग के मामले में भी AI स्टार्टअप्स बाकी टेक कंपनियों से आगे नज़र आते हैं। सीड स्टेज पर इन्हें औसतन 2.4 मिलियन डॉलर मिले, जबकि अन्य टेक स्टार्टअप्स को 1.4 मिलियन डॉलर। सीरीज A में भी AI कंपनियों की औसत फंडिंग 10.5 मिलियन डॉलर रही, जो अन्य कंपनियों के 8.4 मिलियन डॉलर से कहीं अधिक है।
ऊंची होती वैल्यूएशन
सिर्फ फंडिंग ही नहीं, बल्कि इन कंपनियों की कीमत यानी वैल्यूएशन भी लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सीरीज A चरण पर AI स्टार्टअप्स की औसत वैल्यूएशन 53.3 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जबकि रिपोर्ट के पहले संस्करण में यह 38.5 मिलियन डॉलर थी। यह उछाल बाज़ार में इनके प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।
कौन से क्षेत्र सबसे आगे
फंडिंग के लिहाज से देखें तो फिनटेक और इंश्योरटेक सबसे आगे हैं, इसके बाद रिटेल टेक व ई-कॉमर्स और फिर ट्रांसपोर्टेशन व मोबिलिटी का स्थान आता है। वहीं नए स्टार्टअप्स की संख्या के आधार पर AI सॉल्यूशंस पहले स्थान पर है, जो इस क्षेत्र में नई-नई कंपनियों की भरमार को साफ तौर पर दर्शाता है।
रिपोर्ट किसने तैयार की
यह अध्ययन द स्टेट ऑफ ऑपरेटर-लेड स्टार्टअप्स नाम से जारी किया गया, जो इसका दूसरा संस्करण है। इसे निवेश कंपनी RTP Global और डेटा प्लेटफॉर्म Tracxn ने मिलकर तैयार किया और 22 जुलाई 2026 को प्रकाशित किया। ये दोनों ही संस्थाएं भारतीय स्टार्टअप जगत पर बहुत गहरी नज़र रखने के लिए जानी जाती हैं।
रिपोर्ट से जुड़ी अहम आवाज़ों में RTP Global की एशिया निवेश टीम के पार्टनर निशित गर्ग और Tracxn की को-फाउंडर व सीईओ नेहा सिंह शामिल हैं। इनकी संस्थाओं का जुड़ाव इस बात को और मजबूती देता है कि ये आंकड़े भारतीय स्टार्टअप बाज़ार की जमीनी हकीकत पर आधारित हैं।
कुल मिलाकर यह रिपोर्ट एक स्पष्ट संदेश देती है कि भारत में AI अब किसी दूर की संभावना नहीं, बल्कि स्टार्टअप जगत की मुख्यधारा बन चुका है। बढ़ती फंडिंग, ऊंची वैल्यूएशन और नई कंपनियों की भरमार यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में AI भारतीय तकनीकी अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।






