अर्जुन मेहताVIEW PROFILE →
इंडिया एआई मिशन: स्टार्टअप्स को सस्ती जीपीयू कंप्यूटिंग, बाजार से 42 प्रतिशत कम दर पर मिल रही ताकत
भारत सरकार का इंडिया एआई मिशन देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को नई गति दे रहा है। स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को बेहद किफायती दरों पर हजारों जीपीयू उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि स्वदेशी एआई मॉडल भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। सरकार का महत्वाकांक्षी इंडिया एआई मिशन देश के भीतर ही इस तकनीक की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों को किफायती दरों पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध कराना है, ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
सस्ती कंप्यूटिंग शक्ति की उपलब्धता
इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत इसकी कंप्यूटिंग अवसंरचना है। सामान्य कंप्यूट सुविधा के तहत एआई कंप्यूट पोर्टल के माध्यम से अब तक 38 हजार से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी जीपीयू को जोड़ा जा चुका है। कुछ आंकड़ों के अनुसार वर्तमान क्षमता लगभग 34 हजार जीपीयू की है, और सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक इसे बढ़ाकर एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
कीमत के मामले में यह पहल क्रांतिकारी साबित हो रही है। स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों को यह जीपीयू केवल 115 से 150 रुपये प्रति जीपीयू घंटा की दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह दर बाजार की सामान्य कीमतों से लगभग 42 प्रतिशत कम है। इतना ही नहीं, स्वीकृत परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत तक की अतिरिक्त लागत में कमी की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।
बड़ा बजट, बड़ी महत्वाकांक्षा
इस पूरे मिशन के पीछे एक विशाल वित्तीय प्रतिबद्धता है। संपूर्ण एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सरकार ने कुल 10,371.92 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया है, जो लगभग 1.25 अरब डॉलर के बराबर है। यह राशि भारत को इस उभरती हुई तकनीक में एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस निवेश मानी जा रही है।
इस बड़े बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष रूप से कंप्यूटिंग क्षमता के विस्तार के लिए आवंटित किया गया है। जानकारी के अनुसार, अगले पांच वर्षों की अवधि में कंप्यूट घटक के लिए 4,563.36 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। यह दीर्घकालिक योजना सुनिश्चित करती है कि देश में एआई विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा निरंतर मजबूत होता रहे।
नए डेटा सेंटर आकार ले रहे हैं
इस डिजिटल क्रांति को धरातल पर उतारने के लिए देश में नई अवसंरचना तेजी से विकसित हो रही है। चेन्नई में 30 मेगावाट क्षमता की एक सुविधा पहले से ही चालू हो चुकी है और सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसके साथ ही, मुंबई में 40 मेगावाट क्षमता की एक और नई सुविधा स्थापित करने की योजना है, जो देश की गणना शक्ति को और अधिक बढ़ाएगी।
स्वदेशी एआई मॉडल की उड़ान

अवसंरचना के साथ-साथ भारत अपने स्वयं के स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने में भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। इस क्षेत्र में सर्वम एआई नामक कंपनी अग्रणी भूमिका निभा रही है। इस कंपनी ने 18 फरवरी 2026 को अपने दो शक्तिशाली मॉडल, सर्वम-30बी और सर्वम-105बी, लॉन्च किए, जो देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
इस दौड़ में एक और महत्वपूर्ण नाम क्रुट्रिम का है, जो भारत के तकनीकी परिदृश्य में तेजी से उभर रहा है। इस कंपनी ने भी अपने मॉडल विकसित किए हैं, जिनमें 7 बिलियन पैरामीटर वाला क्रुट्रिम-1 और 12 बिलियन पैरामीटर वाला क्रुट्रिम-2 शामिल हैं। ये प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि भारत विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
इन स्वदेशी मॉडलों और सस्ती कंप्यूटिंग शक्ति का संयोजन भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अब तक अत्याधुनिक एआई विकास केवल बड़ी और संसाधन संपन्न कंपनियों तक ही सीमित रहा है, क्योंकि जीपीयू की ऊंची लागत छोटे खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी बाधा थी। इस मिशन के माध्यम से सरकार इस बाधा को दूर कर एआई विकास को सही मायनों में लोकतांत्रिक बनाने का प्रयास कर रही है।
कौन उठा सकता है इसका लाभ
यह मिशन देश के व्यापक तकनीकी समुदाय को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसका लाभ शोधकर्ता, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई तथा अकादमिक संस्थान उठा सकते हैं। इन सुविधाओं तक पहुंच इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, यानी मेइटी, के माध्यम से एक आवेदन आधारित प्रक्रिया के तहत प्रदान की जाती है।
डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान
तकनीकी विकास के इस दौर में सरकार डेटा सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण, यानी डीपीडीपी, नियमों के पूर्ण अनुपालन के लिए मई 2027 की समयसीमा तय की गई है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि तकनीक के तेज विकास के साथ-साथ नागरिकों की निजता और उनके डेटा की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
कुल मिलाकर, इंडिया एआई मिशन देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की एक सुविचारित रणनीति है। सस्ती कंप्यूटिंग, विशाल बजट, नई अवसंरचना और स्वदेशी मॉडलों के इस संयोजन से भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने की आकांक्षा भी रखता है।






