avalw news
अर्जुन मेहताअर्जुन मेहताVIEW PROFILE →

एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा दांव, चिप और डेटा सेंटर से जुड़ी तकनीकी छलांग

tech2026-08-19 · 3 min read · 156 reads

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रशिक्षण देने का संकल्प घोषित किया और इसे सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, कंप्यूट तथा ऊर्जा से जुड़ी बड़ी रणनीति से जोड़ा।

15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का कौशल प्रशिक्षण देने का संकल्प घोषित किया, जिसे उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से सीधे जोड़ा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मकसद युवाओं को इस काबिल बनाना है कि वे एआई के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व कर सकें। उन्होंने युवाओं को देश के विकास की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बताया और अपने पूरे भाषण में बार-बार युवा शक्ति पर जोर दिया।

एक करोड़ युवाओं का लक्ष्य

एक साल में एक करोड़, यानी दस मिलियन युवाओं को एआई में दक्ष बनाना अपने आप में विशाल पैमाने की चुनौती है। यह घोषणा भारत की उस महत्वाकांक्षा का हिस्सा है जिसके तहत देश एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ उसे बनाने और चलाने की क्षमता भी हासिल करना चाहता है।

मोदी ने अपने संबोधन में विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों वाले सप्त धारा रोडमैप का उल्लेख किया और दोहराया कि 2047 तक विकसित भारत बनाने में देश की युवा शक्ति ही सबसे बड़ी ताकत होगी। एआई कौशल का यह अभियान इसी बड़ी तस्वीर की एक अहम कड़ी है।

सेमीकंडक्टर और चिप की तैयारी

एआई की महत्वाकांक्षा को धरातल पर उतारने के लिए सरकार चिप निर्माण पर बड़ा दांव लगा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसका कुल परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले सात से आठ साल में देश में और सेमीकंडक्टर संयंत्र लगेंगे।

अब तक भारत में करीब 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनका कुल निवेश 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। देश की पहली सिलिकॉन फैब यानी चिप निर्माण इकाई के 2028 में चालू होने की योजना है, जो मेड इन इंडिया चिप की दिशा में एक अहम पड़ाव होगी।

कंप्यूट, डेटा सेंटर और ऊर्जा

एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए, जिसकी रीढ़ डेटा सेंटर हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए, जिसकी रीढ़ डेटा सेंटर हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए, और यहीं इंडियाएआई मिशन की भूमिका है। जून 2026 तक इस मिशन के तहत साझा कंप्यूट क्षमता बढ़कर 45,000 से अधिक जीपीयू तक पहुंच चुकी है, ताकि स्टार्टअप और शोधकर्ता किफायती दाम पर एआई मॉडल बना सकें।

इस पूरे ढांचे की रीढ़ डेटा सेंटर हैं, जिनकी क्षमता में तेज उछाल आया है। 2020 में जहां देश की डेटा सेंटर क्षमता करीब 375 मेगावाट थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर लगभग 1,575 मेगावाट हो गई है, और क्लाउड तथा एआई की बढ़ती मांग इसे और ऊपर ले जा रही है।

कंप्यूट की यह भूख सीधे ऊर्जा से जुड़ी है, और सरकार इसे राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा मान रही है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य दोहराया और अगले छह से सात साल में पांच नए परमाणु रिएक्टर चालू करने की बात कही, क्योंकि कंप्यूट संप्रभुता अब ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ती जा रही है।

सरकार का दांव सिर्फ मॉडल पर नहीं, बल्कि पूरे तकनीकी ढांचे यानी कौशल, चिप, कंप्यूट और ऊर्जा पर एक साथ है। नवाचार को गति देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान कोष का ढांचा भी बनाया गया है, ताकि प्रयोगशाला से बाजार तक का सफर तेज हो सके।

इसका मतलब क्या है

जानकारों की नजर में यह घोषणा भारत के उस बदलाव का संकेत है जिसमें देश केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसे बनाने वाला बनना चाहता है। हालांकि असली परीक्षा क्रियान्वयन की है, क्योंकि एक साल में एक करोड़ युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना प्रशिक्षकों, पाठ्यक्रम और उद्योग साझेदारी की कड़ी कसौटी होगी।

वैश्विक मंच पर भारत की यह कोशिश अमेरिका और चीन जैसी बड़ी एआई शक्तियों की होड़ के बीच हो रही है, जहां प्रतिभा भारत का सबसे मजबूत हथियार मानी जाती है। दुनिया के कई बड़े तकनीकी संस्थानों और कंपनियों में भारतीय इंजीनियरों की मौजूदगी इस दावे को और बल देती है।

अगले बारह महीने इस महत्वाकांक्षा की दिशा तय करेंगे, जब प्रशिक्षण के आंकड़े, नई चिप परियोजनाओं की प्रगति और डेटा सेंटर तथा ऊर्जा क्षमता का विस्तार यह बताएगा कि लाल किले से किया गया वादा जमीन पर कितना उतरता है। फिलहाल भारत ने अपनी एआई रणनीति को कौशल और बुनियादी ढांचे के इर्द-गिर्द साफ तौर पर खड़ा कर दिया है।

अर्जुन मेहता
Stay updated
अर्जुन मेहता
Subscribe to get an email whenever अर्जुन मेहता publishes a new story. No spam, unsubscribe anytime.
अर्जुन मेहता
WRITTEN BY THE AUTHOR
अर्जुन मेहता
2026-08-19 · 3 min read · 156 reads
View profile →
VERIFY THIS STORY
ASK AI
MORE FROM अर्जुन मेहता
Report this articlesupport@avalw.com