अर्जुन मेहताVIEW PROFILE →
खरीदने से बनाने तक: भारत का AI और सेमीकंडक्टर मिशन तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा
10,372 करोड़ रुपये के इंडियाAI मिशन के तहत भारत ने 38,000 से अधिक GPU तैनात किए हैं और भारतीय भाषाओं के लिए 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल चुने हैं। साथ ही 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश हो रहा है।
भारत इस समय तकनीक की दुनिया में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। देश का लक्ष्य अब केवल विदेशी तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि उसे खुद बनाना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हो रहे निवेश इसी सोच को दर्शाते हैं। यह बदलाव भारत को एक वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
इस दिशा में सबसे बड़ी पहल इंडियाAI मिशन है, जिसे 10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी गई है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में एक मजबूत और सुलभ AI बुनियादी ढांचा तैयार करना है। इसके तहत शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और कंपनियों को कम कीमत पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल भारत में AI के विकास को गति देने के लिए बनाई गई है।
इस मिशन की रीढ़ शक्तिशाली ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी GPU हैं, जो AI मॉडल के प्रशिक्षण के लिए आवश्यक होती हैं। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इस साझा कंप्यूट सुविधा में अब तक 38,000 से अधिक GPU तैनात किए जा चुके हैं। इन्हें स्टार्टअप और डेवलपर्स को लगभग 65 रुपये प्रति घंटे की सब्सिडी वाली दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, आने वाले महीनों में करीब 20,000 और GPU जोड़ने की योजना है।
भारतीय भाषाओं के लिए AI

इस मिशन का एक बेहद खास पहलू भारतीय भाषाओं और संदर्भों पर केंद्रित है। सरकार ने 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल के प्रस्तावों को चुना है, जिन्हें भारत की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा। इनमें 12 बड़े मल्टीमॉडल मॉडल और आठ छोटे भाषा मॉडल शामिल हैं। ये मॉडल टेक्स्ट, आवाज और दृश्य जैसी विभिन्न विधाओं में काम करने में सक्षम होंगे।
भारत जैसे विविध भाषाई देश के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अधिकतर वैश्विक AI मॉडल मुख्य रूप से अंग्रेजी और कुछ प्रमुख भाषाओं पर आधारित होते हैं। इसके विपरीत, स्वदेशी मॉडल भारत की अनेक भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इससे तकनीक का लाभ देश के कहीं अधिक बड़े हिस्से तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस पूरे तंत्र को सहारा देने के लिए एक साझा मंच भी तैयार किया गया है, जिसे AI Kosh कहा जाता है। इस मंच पर 12,519 से अधिक डेटासेट, 307 AI मॉडल और 20 टूलकिट उपलब्ध कराए गए हैं। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और स्टार्टअप के लिए AI विकास के संसाधनों को आसानी से सुलभ बनाना है। ऐसे साझा संसाधन नवाचार की गति को तेज करने में मदद करते हैं।
10,372 करोड़ रुपये के इंडियाAI मिशन में 38,000 से अधिक GPU तैनात किए गए हैं और भारतीय भाषाओं के लिए 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल चुने गए हैं।
सेमीकंडक्टर की ओर
AI के साथ-साथ भारत सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, देश में इस समय 12 सेमीकंडक्टर इकाइयां स्वीकृत हैं, जिनमें करीब 20 अरब डॉलर का निवेश जुड़ा है। इनमें से तीन इकाइयों ने चिप बनाना भी शुरू कर दिया है। यह इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण, सेमीकॉन 2.0, की नींव तैयार कर रहा है।
इस क्षेत्र में हुई प्रगति के आंकड़े भी उत्साहजनक हैं। अप्रैल 2026 तक, देश के 75 संस्थानों ने कुल 211 चिप डिजाइन तैयार कर लिए थे, जिसे तकनीकी भाषा में टेप-आउट कहा जाता है। इनमें से सात चिप को अलग-अलग तकनीकी नोड पर सफलतापूर्वक बनाया भी जा चुका है, जिनमें 12 नैनोमीटर का नोड भी शामिल है। यह दर्शाता है कि भारत डिजाइन से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादन की ओर कदम रख रहा है।
चिप निर्माण की यह क्षमता भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। सेमीकंडक्टर आज हर आधुनिक उपकरण का दिल हैं, फोन से लेकर कार और डेटा सेंटर तक। घरेलू स्तर पर चिप बनाने से भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी। यही कारण है कि इसे देश की तकनीकी संप्रभुता से जोड़कर देखा जा रहा है।
वैश्विक महत्व
इन सभी प्रयासों ने भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक अहम खिलाड़ी बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के AI इम्पैक्ट समिट के दौरान AI से जुड़े 200 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आईं। इतने बड़े पैमाने पर रुचि यह दर्शाती है कि दुनिया भारत को भविष्य के AI बुनियादी ढांचे के एक केंद्र के रूप में देख रही है। यह देश के लिए एक बड़ा अवसर है।
कुल मिलाकर, ये पहल भारत की सोच में एक बुनियादी बदलाव को दर्शाती हैं। तकनीक को केवल खरीदने के बजाय, देश अब उसे बनाने और उस पर नियंत्रण रखने की दिशा में बढ़ रहा है। बेशक, इस राह में कुशल प्रतिभा, क्रियान्वयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। फिर भी, निवेश का यह पैमाना दिखाता है कि भारत भविष्य की तकनीक को केवल उपयोग करने नहीं, बल्कि आकार देने के लिए गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।





