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भारत का एआई दांव 2026: सस्ते GPU, महाराष्ट्र की 500 करोड़ की नीति और बेंगलुरु में Anthropic

tech2026-08-17 · 4 min read · 3 reads

साल 2026 में भारत का एआई इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है। IndiaAI मिशन के सस्ते GPU, महाराष्ट्र की 500 करोड़ रुपये की एआई नीति और बेंगलुरु में Anthropic का दफ्तर इसकी गवाही देते हैं, पर एक बड़ी कमी अब भी बनी हुई है।

साल 2026 में यह साफ हो चुका है कि भारत का एआई पल आ चुका है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां, सभी एक साथ भारत के एआई इकोसिस्टम में जोर लगा रही हैं। सस्ते कंप्यूटिंग संसाधनों से लेकर बड़े निवेश तक, हर मोर्चे पर हलचल दिख रही है। फिर भी इस पूरी तस्वीर में एक बड़ी कमी अब तक बनी हुई है, जिस पर देश का ध्यान अगले चरण में केंद्रित होगा।

इस बदलाव के केंद्र में है राष्ट्रीय IndiaAI मिशन और उसका सस्ता कंप्यूट। मिशन के तहत स्टार्टअप और डेवलपर्स को अब करीब 34,000 GPU महज 115 से 150 रुपये प्रति GPU घंटे की दर पर उपलब्ध हैं। यह दर बाजार के मुकाबले लगभग 42 प्रतिशत कम है, जिससे एआई पर काम करना कहीं अधिक किफायती हो गया है। मकसद साफ है, कि महंगे कंप्यूटिंग की दीवार गिराकर एआई विकास को आम डेवलपर तक पहुंचाया जाए।

GPU क्षमता के आंकड़े इस विस्तार की रफ्तार बयां करते हैं। शुरुआत में 10,000 GPU का लक्ष्य रखा गया था, जो बढ़कर 18,417 तक पहुंचा, फिर मई 2025 तक 34,333 का आंकड़ा पार कर गया। दिसंबर 2025 तक यह क्षमता 38,000 से भी ऊपर जा पहुंची। अब सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक एक लाख GPU तक पहुंचने का है, जो एक बेहद महत्वाकांक्षी छलांग होगी।

इतने बड़े पैमाने पर सस्ते कंप्यूट का महत्व भारत जैसे देश के लिए बहुत गहरा है। लाखों इंजीनियरों और डेवलपर्स वाले देश में, GPU तक सस्ती पहुंच एआई निर्माण की सबसे बड़ी बाधा को हटा देती है। पहले जहां केवल बड़ी कंपनियां ही भारी कंप्यूटिंग खर्च उठा सकती थीं, अब छोटे स्टार्टअप भी मैदान में उतर सकते हैं। इससे भारतीय एआई स्टार्टअप की एक नई लहर पैदा होने की संभावना बनती है।

महाराष्ट्र का बड़ा दांव

राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र ने सबसे आक्रामक कदम उठाया है। राज्य ने एआई नीति 2026 को मंजूरी दी है, जिसमें 500 करोड़ रुपये का समर्पित एआई स्टार्टअप वेंचर फंड बनाया जाएगा, जिसमें से 250 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी। इसके साथ ही 12 एआई इनक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे, जो हर स्टार्टअप को एक करोड़ रुपये तक की मदद दे सकते हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान है।

इस नीति के पीछे की महत्वाकांक्षा और भी बड़ी है। महाराष्ट्र का लक्ष्य 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और 2031 तक करीब डेढ़ लाख नौकरियां पैदा करना है। नीति में सरकारी विभागों के लिए एआई तैयारी ऑडिट अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशासन भी इस बदलाव के लिए तैयार रहे। साथ ही 2,000 GPU वाला एक साझा कंप्यूटिंग ढांचा तैयार होगा, जो कंप्यूट-ऐज-अ-सर्विस मॉडल पर उपलब्ध होगा।

IndiaAI मिशन के तहत करीब 34,000 GPU बाजार से 42 प्रतिशत सस्ती दर पर उपलब्ध हैं, और लक्ष्य एक लाख GPU का है।

वैश्विक कंपनियों की नजर भारत पर

भारत अभी भी अपने एआई कंप्यूटिंग के लिए आयातित चिप और GPU पर निर्भर है, जो देश की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत अभी भी अपने एआई कंप्यूटिंग के लिए आयातित चिप और GPU पर निर्भर है, जो देश की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकार और राज्यों के प्रयासों को अब वैश्विक कंपनियों का साथ भी मिल रहा है। एआई कंपनी Anthropic ने बेंगलुरु में अपना दफ्तर खोल दिया है, जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में उसका दूसरा ठिकाना है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अब उसके Claude.ai के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इस दफ्तर की कमान इरीना घोष संभाल रही हैं, जो पहले माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक रह चुकी हैं।

Anthropic का भारत पर ध्यान सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है। कंपनी ने हिंदी, बंगाली और तमिल समेत दस व्यापक रूप से बोली जाने वाली भारतीय भाषाओं के लिए प्रशिक्षण डेटा तैयार किया है। इसके साथ ही उसने विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारियों की घोषणा भी की है। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक एआई कंपनियां अब भारत को हाशिये पर नहीं, बल्कि अपनी रणनीति के केंद्र में रख रही हैं।

इतनी रफ्तार के बावजूद एक बुनियादी कमी अब भी कायम है। तमाम प्रगति के बीच भारत के पास अपनी घरेलू एआई चिप नहीं है और वह आयातित GPU पर निर्भर है। अपनी सिलिकॉन क्षमता खड़ी करना ही वह गुम कड़ी है, जो असली तकनीकी आत्मनिर्भरता तय करेगी। कंप्यूट किराए पर लेना एक शुरुआत है, लेकिन उसे बनाना अगली और कहीं कठिन चुनौती है।

कुल मिलाकर, 2026 में भारत की एआई कहानी रफ्तार और पैमाने की कहानी है। सस्ता कंप्यूट, राज्यों का पैसा और वैश्विक कंपनियों का भरोसा, तीनों एक साथ जुट रहे हैं। लेकिन असली तकनीकी संप्रभुता चिप की खाई को पाटने पर निर्भर करेगी। फिलहाल देश पहले इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है और सिलिकॉन को अगले चरण के लिए छोड़ रहा है, यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह आने वाला समय बताएगा।

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